तस्बीह कर के वो मुझको दे गया है ज़िंदगी
एक रात के लिए मुझको दे गया है बंदगी
ख्वाब था,जमाल था ,बड़ा हसीं ख़याल था
सवाल का जवाब दे ,सवाल कर गया है ज़िंदगी
वो बुरा सही ,वो खफा सही ,वो मेरा है मलाल क्या
पर सीने में ये खलिश सी क्यों होती हो ए ज़िंदगी
गुरुवार, 10 अप्रैल 2008
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