हर रोज़ फलक का कैनवास बदलता है
हर रोज़ नई एक पेंटिंग उभरती है
मेरा चेहरा कहीं नज़र आता नही ,
चित्रकार का भी पता कहीं मिलता नही ,
कौन से रंग रंगी हैं आंखें मेरी ,
कौन सा गुलाल रंग है हाथों में मेरे ,
सुर्ख रंग आफ्ताबी दमकता हुआ चहेरा मेरा
या नीला रंग समंदारी चमकता हुआ दिल मेरा
मन कुछ काला ,मटमैला सा
या दूधिया रंग तारो का,महताबी चेहरे सा
हरा रंग हरियाली सा घर-आँगन मेरा भरा हुआ
या पीला रंग ज़र्द कुछ बुढापे का सेहरा मेरा
हर रंग में रंगा लगता है चेहरा मेरा
सतरंगी इन रंगों में जाने कौन सा है रंग मेरा
..
.......... इन रंगों को उधार ले शायद चित्रकार मुझसे ही ,
रंग बनाता है कायनात का मेरे ही तन से
अब रंग तेरा हो .... या हो रंग मेरा
एक रंग में लगता है सब कुछ ही रंगा हुआ !
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